जानिए CAA  ( Citizenship Amendment Act , 2019 ) क्या है ?
CAA  ( Citizenship Amendment Act , 2019 




CAA  ( Citizenship Amendment Act,2019 )   को गृह मंत्रालय अमित शाह द्वारा 9 दिसंबर, 2019 को लोकसभा में पेश किया और लोकसभा में 311 बनाम 80 वोटों से यह विधेयक पास  हो गया। इसके बाद इसको 11 दिसंबर 2019  को राज्यसभा में भी पेश किया गया और 125 बनाम 99 वोटो से यह  बिल राज्यसभा में भी पास हो गया , और 12  दिसंबर 2019 को देश के राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून बन गया जिसके बाद इस कानून के तहत  अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया है। पहले किसी  व्यक्ति को भारत की नागरिकता पाने के लिए कम से कम 11  साल तक यहाँ रहना जरुरी था लेकिन इस कानून के बाद 11  साल की अवधि को घटाकर 1 साल से लेकर 6  साल किया गया हैं जिसके बाद इन 3 देशो से आये  हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन धर्मों के लोगो को भारत की नागरिकता मिलना आसान हो गया है


जानिए CAA  ( Citizenship Amendment Act , 2019 ) क्या है ?
CAA  ( Citizenship Amendment Act , 2019 




CAA  ( Citizenship Amendment Act , 2019 ) क्यों है  ये देश के लिए जरुरी ?


अफगानिस्तान, पाकिस्तान , बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यकः  ( हिन्दू, सिख,ईसाई ,जैन ,पारसी बौद्ध ) लोगो पर हो रहे  अत्याचार अथवा उत्पीड़न को देखते हुए यहा जरुरी हो गया था कि  इन देशो से  भारत आये और प्रवासियों की तरह रह रहे  अल्पसंख्यकः लोगो को भारत में रहने के लिए नागरिकता जल्द समय में दिलवाई जा सके क्यूंकि  बांग्लादेश में 1951 में हिंदुओं की हिस्सेदारी 22% थी जो 2011 में 9.5% रह गई  वो इसलिए क्यूंकि ज़्यदातर हिन्दुओ को जबरन धर्म परिवर्तन करके उनको मुस्लिम  बना दिया हिंदू कहते हैं कि बिना कानून के उनकी औरतें बलात्कार या जबरन विवाह का आसान शिकार बनती थीं और अपने रिश्ते को साबित करने के लिए उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। वर्ष 1947 में जब भारत का विभाजन हुआ, लाखों की संख्या में हिन्दू और मुसलमानों ने धर्म के आधार पर मुल्क बदला। फिर भी कुछ मुसलमान ऐसे थे, जो भारत में ही रह गए, और इसी तरह कुछ हिन्दू पाकिस्तान में। भारत ने हिन्दू राष्ट्र बनने की बजाए धर्मनिरपेक्ष राज्य बनना पसंद किया, ताकि भारत में रहने वाले अल्पसंख्यक खुद को असुरक्षित न समझें, उन्हें समान अधिकार मिलें और इसके लिए भारत ने अपने संविधान में धर्म चुनने की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकारों की सूची में स्थान दिया है। भारत विभाजन से पहले मुसलमानों की संख्या भारत की कुल आबादी का 10 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर लगभग 15 प्रतिशत हो गई है।लेकिन पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं की किस्मत भारतीय मुसलमानों जैसी न तब थी और ना आज  है । पाकिस्तान के नेशनल कमिशन फॉर जस्टिस एंड पीस की वर्ष 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक 74 प्रतिशत हिन्दू महिलाएं यौन शोषण का शिकार होती हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की वर्ष 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में हर महीने 20 से 25 हिन्दू लड़कियों का अपहरण होता है और ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया जाता है।जब पाकिस्तान में जीने के लिए अनुकूल स्थिति नहीं रही तो मजबूरन हिन्दुओं को बड़ी संख्या में पाकिस्तान छोड़ना पड़ रहा है। पाकिस्तान की जनगणना (1951) के मुताबिक पाकिस्तान की कुल आबादी में 22 फीसदी हिन्दू थे, जो 1998 की जनगणना में घटकर 1.6 फीसदी रह गए हैं। ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1965 से लेकर अब तक तकरीबन सवा लाख पाकिस्तानी हिन्दुओं ने भारत की तरफ पलायन किया है। अब आप है बताइये भारत सरकार ने क्या गलती करा देश में CAA  लागू कर के  सोचे जरूर, जवाब खदु आपका दिल दे देगा एक बार बस वहां रह रहे हिन्दुओ की जगह अपने आप को रख कर  देखना यकीन करो रूह काँप जाएगी आपकी 


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