Jawaharlal Nehru University (JNU)                     


   Jawaharlal Nehru University (JNU)

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय  देश की सर्वोच्च विश्वविद्यालय  में से एक है यहाँ पर स्टूडेंट  अपना एक बेहतरीन  भविष्य और देश का नाम रोशन हो ऐसी शिक्षा दी जाती है लेकिन उसी विश्वविद्यालय में जब भारत तेरे टुकड़े होंगे और अफजल हम शर्मिंदा है तेरे कातिल अभी जिन्दा है जैसे नारे लगते है तो इसे ज्यादा शर्म की बात हमारे  देश के लिए और देश के नागरिको के लिए कोई दूसरी नहीं हो सकती है 





,आखिर क्यों ऐसा होता है जो  इस देश का खाते है इस देश में रहते है और उसी देश के टुकड़े हों की दुआ मांगते है बहुत गुस्सा आता है जब ऐसा कुछ हमारे देश में होता है और करते भी वही लोग है जो इस के देश भविष्य होते  है, जिनके कंधो  पर इस देश को उचाईयो पर ले जाने की जिम्मेदारी होती है ये वही लोग है जो आपके टैक्स पर पलेंगे , चुनाव गाँव में, राजनीति दिल्ली में करेंगे, आज़ादी जिन्ना वाली और टुकड़े फिर भारत के करेंगे।  8 हज़ार स्टूडेंट ,18 हॉस्टल ,3 हज़ार से ज्यादा रूम और एक हॉस्टल पर 10 कुक, 16 सहायक , 2 मैनेजर और फीस 16रु , खून में आग लगती है सिर्फ इसलिए नहीं जो जेएनयू  में 5 तारीख को हुआ , पिछले 70 दिन से जेएनयू  में कोई क्लास नहीं हुई 4.50 लाख रुपए एक बच्चे का पढ़ाई का खर्चा आता है फर्क  पड़ना चाहिए क्यूंकि 8 हज़ार बच्चो का हर साल दिन का करीब 1 करोडे रुपए का खर्च आपके बाप की जेब से जाता है।  नहीं फर्क पड़ना चाहिए क्या जब आपके पैसो पर पलने -पड़ने वाले बच्चे सिर्फ महीनो तक इसलिए आंदोलन करे क्यूंकि जेएनयू  में रात को खाने का ढाबा बंद हो जाता है , इसलिए आंदोलन करते है क्यूंकि उनकी सिर्फ 75% अटेंडेंस के लिए बोला  जाता है  , इसलिए जश्न बनाते है क्यूंकि छत्तीसगढ़ में  76 जवान शहीद हुए थे  और इसलिए बरषी करते है क्यूंकि अफजल गुरु शहीद हुआ था इसलिए 70 दिन तक यूनिवर्सिटी बंद करते है क्यूंकि 20 रुपए की हॉस्टल की फीस को ज्यादा  कर 300 रुपए कर दिया जाता है  कौनसी  पढ़ी लिखी नस्ले ऐसे करती है जो क्लास ही न होने दे जो आपको सपोर्ट न करे तो गुंडागर्दी करके उनको भी न पढ़ने दे अगर ऐसे ही आंदोलन होते है न तो देश में CAA  के  नाम पर  हिंसा करने वाले भी सही ही और ऐसे लोगो पर जबरदस्त लाठिया मारने वाले पुलिस वाले भी सही है , जब जामिया यूनिवर्सिटी में  पुलिस गयी तो पुलिस क्यों गयी और जब जेएनयू  के अंदर पुलिस नहीं गयी तो पुलिस बिक गयी वहा भाई वहा। ये इनाम है आपके सही को गलत और गलत को देख कर चुप रहने का इसलिए चुप न रहे समझदार बने और पहचाने कौन है ये लोग और क्या चाहते है और क्या इरादे है इनके, ये वही आस्तीन के साप है जो हमारे देश को अंदर ही अंदर बर्बाद कर रहे है।  

जय हिन्द 

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