भगत सिंह- 
भगत सिंह  Story in hindi
भगत सिंह  Story in hindi

27 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले (जो अब पाकिस्तान में है) के बंगा में एक बच्चे ने जन्म लिया था, जिसका नाम था भगत सिंह तब किसी ने ये नहीं सोचा था आगे भविष्य में यही बच्चा हिंदुस्तान में एक नई क्रांति लेकर आएगा। भगत सिंह एक वह नाम जिसे सुन कर क्रांति आज़ादी स्वाभिमान जैसे शब्दों का असली मतलब पता चला हिंदुस्तान को। भगत सिंह करतार सिंह सराभा और लाला लाजपत राय से अत्यधिक प्रभावित थे। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह के बाल मन पर बड़ा गहरा प्रभाव डाला। क्रांति कैसे लायी जाती है, अपनी और अपने देश की आज़ादी के लिए कैसे लड़ा जाता है ये बात उस नौजवान ने हिंदुस्तान को सिखायी। लाहौर के नेशनल कॉलेज़ की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह ने 1920 में भगत सिंह महात्‍मा गांधी द्वारा चलाए जा रहे अहिंसा आंदोलन में भाग लेने लगे, 1921 में जब चौरा-चौरा हत्‍याकांड के बाद गांधीजी ने किसानों का साथ नहीं दिया तो भगत सिंह पर उसका गहरा प्रभाव पड़ा, उसके बाद चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्‍व में गठित हुई गदर दल के हिस्‍सा बन गए। आज़ादी सिर्फ़ चरखे से नहीं आज़ादी मिलती है क़ुर्बानी से ये बात भगत सिंह ने हिंदुस्तान की अवाम को बताया और जब भारत देश को आज़ाद हुए 72 साल हो गये तो देश की हर माँ ये सपना देखती है कि भारत देश का बच्चा-बच्चा भगत सिंह बने पर एक कड़वा सच ये भी है कोई माँ ये नहीं चाहती क़ि उसका बेटा भगत सिंह बने, क्यूँकि अपने बेटे को अपनी आँखो के सामने शहीद होता हुआ कोई माँ नहीं देख सकती तो ज़रा सोचिए कितने कलेजे में आग लगी होगी उस माँ के जब भगत सिंह ने जेल में अपनी माँ से बोला था आज़ादी ही मेरी दुल्हन है और ये बोलते-बोलते वह हिंदुस्तान की आज़ादी के लिए हस्ते-हस्ते क़ुर्बान हो गये। 9 अगस्त, 1925 को शाहजहांपुर से लखनऊ के लिए चली 8 नंबर डाउन पैसेंजर से काकोरी नामक छोटे से स्टेशन पर सरकारी खजाने को लूट लिया गया। यह घटना काकोरी कांड नाम से इतिहास में प्रसिद्ध है। इस घटना को अंजाम भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद और प्रमुख क्रांतिकारियों ने साथ मिलकर अंजाम दिया था




भगत सिंह  Story in hindi
भगत सिंह  Story in hindi


 हम कभी नहीं भूल सकते उन क्रांतिवीर और इंक़लाव के दीवानो की क़ुर्बानी जिन्होंने अपना बचपन, जवानी त्याग दी सिर्फ़ हिंदुस्तान के सुनहरे भविष्य के लिए, क्यूँकि हम अपने सपने पूरे कर सके उन्होंने अपने सपनो को कुचल दिया हम कभी नहीं भूल सकते एसे क्रांतिकारी भगत सिंह को जिनकी आँखो में मौत को सामने होते हुए भी चहेरे पर हँसी हो। भगत सिंह को फ़िल्में देखना और रसगुल्ले खाना काफी पसंद था। वे राजगुरु और यशपाल के साथ जब भी मौका मिलता था, फ़िल्म देखने चले जाते थे। चार्ली चैप्लिन की फ़िल्में बहुत पसंद थीं। इस पर चंद्रशेखर आजाद बहुत गुस्सा होते थे। और एक दिन भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसम्बर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अफसर जेपी सांडर्स को मारा था। इसमें चन्द्रशेखर आज़ाद ने उनकी पूरी सहायता की थी। भगत सिंह क्रांतिकारी देशभक्त ही नहीं बल्कि एक चिंतक अध्ययनशीरल विचारक, कलम के धनी, दार्शनिक, , लेखक, पत्रकार और महान मनुष्य थे। उन्होंने 23 वर्ष की छोटी-सी आयु में फ्रांस, आयरलैंड और रूस की क्रांति का विषद अध्ययन किया था। भगत सिंह हिट्लर से काफ़ी प्रभाभित थे और 23 मार्च 1931 को भगत सिंह तथा इनके दो साथियों सुखदेव व राजगुरु को फांसी दे दी गई। हम में  से कोई भगत सिंह तो क्या उनके  पैर की धूल भी नहीं बन सकते, पर अफ़सोस की बात ये है आज हमारे देश में कभी भी आज़ादी का ज़िक्र होता है तो गांधी जी, नेहरू जी को याद किया जाता है उनको क्यूँ नहीं जिनकी वजह से हम आज़ाद है।  भगत सिंह ने एक बार बोला था कि-

आज़ादी शांति से नही क्रांति से आती है






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Writer - Yash sharma 














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