Bharat - विश्वगुरु
Bharat - विश्वगुरु

Bharat - विश्वगुरु 

भारत सुनते ही दिमाग से पहले दिल में एक बात आती है त्याग तप की पावन भूमि। सच है भारत त्याग और तप की भूमि है लेकिन कुछ बाहरी लोगों ने यहाँ का इतिहास काले पन्नों पर लिख दिया पहले मुस्लिम आक्रमणकारी फिर व्यापार करने वाली विदेशी सरकारें इत्यादि इन सब ने भारत की मूल संस्कृति पर गहरा प्रभाव डाला जिसके बाद जब तक हम इनसे उबर पाते ये कहीं ना कहीं हमारे समाज में जगह बना चुके थे और हमने "वसुधैव कुटुम्बकम्" के कारण प्रत्येक व्यक्ति को अपना भाई माना चाहे भूत काल में वह कैसा भी हो और यही खूबसूरती है इस देश की सबको अपनाकर ये साथ चला। उसके बाद आजाद हुआ देश लेकिन कमजोर सरकार और स्वार्थी नेतृत्व ने देश की नींव को कमजोर करने की कोशिश को जो कामयाब तो ना हो सकी लेकिन देश को बहुत सारे जयचंद दे गई परन्तु कहीं न कहीं देश का हित सोचने वाले लोगों द्वारा देश और इसकी सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने की कामयाब कोशिश हुई। एक समय था जब भारत विश्व गुरु था इसने दुनिया को सिखाया पड़ाया यहाँ की पावन धरती ने आदि काल से दुनिया को ज्ञान दिया। आज समय है हम फिर से पाश्चात्य संस्कृति से बच कर भारतीय संस्कृति को प्रोत्साहित करें, प्रचार करें, फिर से विश्व गुरु बनने का प्रयास करें और हम बन सकते है क्योंकि ये त्याग की भूमि आज भी वीर, सहासी पुत्रों को जन्म देती है, यहाँ की भूमि आज भी खगोशास्त्रीयों, गणितज्ञों, रसायन वैज्ञानिकों, महान नायकों, कलाकारों इत्यादि को जन्म देती है। बस हमें अपने देश से प्यार करते हुए तन, मन, धन से इसकी सेवा कर के विश्व का नेतृत्व करना है और फिर से हमारे भारत को विश्वगुरु बनाना है।

जय हिन्द। वन्दे मातरम्। 




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