Delhi Election Fact Check—:

लोगों की फ्री वाली मानसिकता से लड़ना बहुत मुश्किल काम है , इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते है कि चार महीनें से बिजली के बिल जीरो आ रहे है...हर महीनें 700-800 करोड़ रुपये का बिल लोगों से लिया ही नहीं जा रहा मतलब चार महीनें में लगभग 3200 करोड़ का नुकसान दिल्ली सरकार को हुआ...!और पिछले चार महीने से पानी का बिल नहीं आ रहे ओर हर महीने 400-500 करोड़ बिल नहीं लिया गया मतलब  चार महीनों में लगभग 2000 करोड़ का नुकसान...!माना जाता है भारतीय राजनीति में ये मुफ्त की सेल सबसे पहले तमिलनायडू में लगायी गयी थी, ये कोई नई बात नहीं है भारतीय राजनीति में ये मुफ्त की राजनीती बहुत पहले से चल रही है, 80 के दशक में तमिलनायडू के मुख्यमंत्री M.G Ramchandran ने धोती और साड़ी इसकी शुरुआत की थी, अपनी मुफ्त वाली योजनाओ में बाद में उन्होंने चप्पल, बच्चो के पाउडर को भी जोड़ दिया था, लेकिन ये लिस्ट अब स्कूटी और पानी से लेकर लैपटॉप और बिजली तक पहुंच गयी है। एक ज़माने में जहाँ सिर्फ़ मुफ्त की साड़ी दी जाती थी, और आज की बिजली, मुफ्त का पानी, मुफ्त का बस किराया, मुफ्त पढ़ाई, मुफ्त चिकित्सा तक आ गयी है। अब आप सोचिये ये लिस्ट इसके बाद कहाँ तक जाएगी, अब हमारी ज़रूरत की ऐसी चीज रहे गयी है जिसका आप पैसा देते है अगर रहे गयी है तो आने में वह ज़रूरत भी पूरी हो जाएगी।





Delhi Election Fact Chec
Delhi Election Fact ChecK




आखिर ये योजनाओं का पैसा आता कहाँ से है?

दिल्ली के खर्च का कुल 71 % हिस्सा यानी 42500 करोड़ रुपए दिल्ली के लोगो पर लगाए गए टैक्स के रूप में आता है, इसी तरह दिल्ली के खर्च का 11 %हिस्सा 6700 करोड़ रूपये केंद्र सरकार देती है। दिल्ली सरकार को अभी भी अपने 18 % खर्च की व्यवस्था करनी है, इसके लिए पैसा कहाँ से आएगा इसका जवाब नहीं है किसी के पास इसके लिए या कर्ज लेना पड़ेगा या फिर अपने पुराने फण्ड का इस्तमाल करना होगा। कुल मिलकर मुफ्त की योजनाओ का खर्च पब्लिक की जेब से निकला जाता है और निकला भी जा रहा है कही जगह




फ्री सेवा  वाले आकड़े :-

वहीं पिछले चार महीनो से महिलाओं से बस यात्रा का कोई बिल नहीं लिया जा रहा है मतलब  हर महीने 140-150 करोड़ ओर पिछले चार महीनों में 600 करोड़ का नुकसान हुआ है दिल्ली सरकार को...!वहीं फ्री मैट्रो का यही खर्चा लगभग हर महीने लगभग 140-150 पिछले चार महीनों का लगभग 600 करोड़ का नुकसान...!और कुछ ऐसा नहीं किया जो पहले ना हो "महौल्ला क्लिनिक" की एवरेज में कही उस्से वर्ल्ड क्लास योजना "आयुष्मान भारत" तो कुल खर्चा मिला लिय जाऐ तो ये लगभग 6400 करोड़ खर्च करके खुजलीवाल चुनाव जीत लिया , ये 60k करोड़ के सालाना बजट वाली सरकार ने अपने हिस्से का लगभग 20k करोड़ फ्री बांटने में खर्च कर देगी मतलब  बजट का 34% हिस्सा बाकी विकास  कहा से आयेगा फिर कटौरा लेकर या तो केन्द्र सरकार के पास जायेगे...या फिर ये सब बन्द करना पडेगा,ये फ्री वाली राजनिति का एक ऐसा उदाहरण सेट हुआ कि ये आगे भी चैलेंजिग होगा... इसने अन्य राज्य सरकारों को रास्ता दिखाया है और ऐसा लगता है महाराष्ट्र सरकार यही सोच रही और ऐसा ही कुछ पश्चिम बंगाल सरकार का भी प्लान है...!
बांटते रहो फ्री अगर इस्से राष्ट्र कल्याण हो जाऐ तो...!
Ajit Singh जी  की एक लाइन  याद आ रही है

 "इन तितलियो कों संघर्ष करने दो" अगर नहीं करने दिया तो इस देश का बंटाधार होना तय है...



अगर किसी को गलत लगे तो कृपया कमेंट बॉक्स सुझाव दें 🙏





Follow me on Facebook:- Patriotic Tech 

Post a Comment

Previous Post Next Post