गंगा जमुनी (यमुना) तहज़ीब

गंगा जमुनी (यमुना) तहज़ीब, हिन्दू-मुस्लिम एकता, धर्मनिरपेक्षता सुनने में बहुत अच्छे लगते है और देश की अखंडता के लिए भी आवश्यक है परन्तु तभी जब इसकी नींव सच्चाई पर टिकी हो।आज मैं बात कर रहा हूँ गंगा जमुनी तहजीब की। गंगा जमुनी तहजीब को समझने से पहले हमें जानना होगा इसका आरंभ कहाँ से और कैसे हुआ जिसके लिए हम इतिहास में 1724 के अवध प्रांत चलते है, अवध के निज़ाम शादम खान (पारसी मूल) ने गंगा जमुनी तहजीब का शुभारंभ किया परन्तु इसका नाम गंगा जामुनी क्यों रखा गया ये आसानी से समझ नहीं आता। इसके दो कारण हो सकते है पहला धर्म के द्वारा और दूसरा क्षेत्र के द्वारा।

Ganga - Jamuni  (यमुना) तहज़ीब
Ganga - Jamuni  (यमुना) तहज़ीब 

धर्म के आधार पर-


यदि इस तहजीब को धर्म के आधार पर देखें तो हम खुद को ठगा-सा महसूस करेंगे क्योंकि गंगा (माँ) सनातन धर्म के अनुसार ब्रह्मा जी की पुत्री है, जो महान तपस्वी भागीरथ जी की हजारों वर्षों की तपस्या के कारण स्वर्ग लोक से मृत्यु लोक पर अवतरित हुई और वहीं सनातन धर्म के अनुसार यमुना जी सूर्य व छाया की पुत्री, यम की बहन व भगवान श्री कृष्णा की पट रानी भी है। इन दोनों के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमनोत्री है जो कि सनातन धर्म में मुख्य तीर्थ स्थल है परन्तु इस्लाम का धार्मिक रूप से इन दोनों से कोई लेना देना नहीं है जिससे स्पष्ट होता है कि धार्मिक आधार पर गंगा जमुनी तहजीब का कोई अस्तित्व नहीं हो सकता।



Ganga - Jamuni  (यमुना) तहज़ीब
Ganga - Jamuni  (यमुना) तहज़ीब 


क्षेत्र के आधार पर:-





यदि गंगा जमुनी तहजीब को क्षेत्र के आधार पर देखा जाए तो गंगा के किनारे बसने वाले मुख्य नगर ऋषिकेश, हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना इत्यादि है वहीं यमुना किनारे बसने वाले मुख्य नगर दिल्ली, गरा, मथुरा, प्रयागराज इत्यादि है और प्रयागराज में इन दोनों नदियों का संगम होता है तो यदि इन नगरों की बात करें जो दोनों नदियों के किनारों पर या इनके बीच के क्षेत्र में बसे हुए है तो हम पाएंगे कि यहाँ हिन्दू बहुसंख्यक है व मुस्लिम अल्पसंख्यक जिससे सिद्ध होता है कि क्षेत्र के अनुसार भी यह तहजीब अस्तित्व में नहीं आ  सकती।गंगा-जमुनी तहजीब सिर्फ़ हिंदुस्तान के हिन्दू को धर्मनिरपेक्षता का चोला पहना कर कमजोर करने की साज़िश थी जो वर्तमान में भी चल रही है। यह तहजीब धर्मनिरपेक्षता के नाम पर रचा हुआ एक षडयंत्र मात्र है। इसका भौतिक रूप में अस्तित्व ही नहीं है और आज के समय में यह राजनीति करने का अच्छा साधन है।




वन्दे मातरम्।
जय हिन्द।


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